डेडज़ोन टेस्ट: अंदरूनी और बाहरी डेडज़ोन की सटीक जाँच
यह मुफ़्त डेडज़ोन टेस्ट आपको बताता है कि आपके एनालॉग स्टिक को ड्रिफ्ट से बचाने के लिए असल में कितनी डेडज़ोन चाहिए, और कितनी डेडज़ोन बेवजह आपकी सटीकता खा रही है। टेस्टर स्टिक की कच्ची X और Y वैल्यू पढ़ता है, आराम वाली हलचल का घेरा नापता है, बाहरी किनारे पर स्टिक कहाँ तक पहुँचता है यह दिखाता है, और गोल ग्राफ़ पर अलग-अलग डेडज़ोन आकार का असर समझाता है। अपना कंट्रोलर USB या Bluetooth से जोड़िए और गेम की सेटिंग बदलने से पहले असली संख्याएँ देख लीजिए।
अपना कंट्रोलर USB या Bluetooth से जोड़ें, फिर कोई भी बटन दबाएँ
कंट्रोलर नहीं दिख रहा?
- Gamepad API के सबसे अच्छे सपोर्ट के लिए Google Chrome, Microsoft Edge, Brave या Opera इस्तेमाल करें।
- यह पेज खोलने के बाद कोई भी बटन दबाएँ या स्टिक हिलाएँ, ताकि ब्राउज़र गेमपैड को चालू कर सके।
- Firefox में जुड़े हुए कंट्रोलर टैब को तभी दिखते हैं जब आप एक बार कोई बटन दबाते हैं।
- macOS और iOS 16+ पर Bluetooth सेटिंग्स में देखें कि आपका कंट्रोलर पेयर हुआ है या नहीं।
मोशन, टचपैड और बैटरी (PS4 / PS5)
WebHID मोड Sony DualShock 4, DualSense और DualSense Edge को सपोर्ट करता है।
डेडज़ोन टेस्ट पाँच आसान स्टेप में
- कंट्रोलर जोड़कर पहचान करवाएँ: कंट्रोलर को डेटा वाली USB केबल या Bluetooth से जोड़ें और कोई भी बटन दबाएँ। दोनों स्टिक के गोल ग्राफ़, X और Y की संख्याएँ और डेडज़ोन का ओवरले स्क्रीन पर आ जाएगा।
- आराम वाली हलचल रिकॉर्ड करें: कंट्रोलर को मेज़ पर रखें, स्टिक न छुएँ और कुछ सेकंड की रिकॉर्डिंग चलाएँ। टेस्टर केंद्र के आसपास सबसे बड़ा विचलन नोट करता है। यही संख्या आपकी अंदरूनी डेडज़ोन की न्यूनतम सीमा है।
- स्टिक को छोड़कर वापसी नापें: स्टिक को हर दिशा में पूरा झुकाकर अचानक छोड़ें और देखें कि बिंदु कहाँ रुकता है। अलग-अलग दिशाओं से छोड़ने पर रुकने की जगह का फैलाव बताता है कि स्प्रिंग कितनी सटीकता से स्टिक को बीच में लाती है।
- धीमी हलचल से शुरुआत का बिंदु देखें: स्टिक को केंद्र से बहुत धीरे एक दिशा में धकेलें और देखें कि किस value पर संख्या स्थिर रूप से बढ़ने लगती है। इससे पता चलता है कि हार्डवेयर या ड्राइवर में पहले से कोई छिपी डेडज़ोन तो नहीं है।
- गोल घुमाकर बाहरी डेडज़ोन जाँचें: स्टिक को किनारे से सटाकर कुछ बार गोल घुमाएँ। अगर कुछ दिशाओं में value 1.00 तक नहीं पहुँचती, तो गेम में बाहरी डेडज़ोन थोड़ी बढ़ानी पड़ सकती है ताकि हर दिशा में पूरी रफ़्तार मिले।
डेडज़ोन टेस्ट के नतीजे और उनसे डेडज़ोन सेटिंग कैसे चुनें
डेडज़ोन को आम तौर पर 0 से 1 की स्टिक रेंज के हिस्से के रूप में बताया जाता है, जैसे 0.10 का मतलब है स्टिक की कुल दूरी का दस प्रतिशत। गेम कई बार इसे 0 से 100 के पैमाने पर दिखाते हैं। नीचे की टेबल मापे गए विचलन से सेटिंग तय करने का व्यावहारिक तरीका बताती है। ये सीमाएँ अनुभव पर आधारित सुझाव हैं, कोई आधिकारिक मानक नहीं।
| मापा गया विचलन | सुझाई गई अंदरूनी डेडज़ोन | असर | कब सावधान रहें |
|---|---|---|---|
| 0.0200 तक | 0.03 से 0.05 | बहुत बारीक निशाना, लगभग कोई सुस्ती नहीं | बहुत कम सेटिंग पर कभी-कभार हल्की हलचल |
| 0.0200 से 0.0500 | 0.06 से 0.08 | ज़्यादातर गेम के लिए संतुलित | पुराने कंट्रोलर में संख्या धीरे बढ़ सकती है |
| 0.0500 से 0.0800 | 0.09 से 0.12 | ड्रिफ्ट रुकता है, शुरुआती हलचल थोड़ी सुस्त | समय-समय पर दोबारा जाँचें |
| 0.0800 से 0.1200 | 0.13 से 0.16 | धीमी हरकत में साफ़ सुस्ती | सफ़ाई या मरम्मत पर विचार करें |
| 0.1200 से ऊपर | 0.17 या ज़्यादा | सटीकता में बड़ा नुकसान | स्टिक मॉड्यूल बदलने का समय |
| किनारे पर अधिकतम 0.95 से कम | बाहरी डेडज़ोन 0.05 से 0.08 | हर दिशा में पूरी रफ़्तार | ज़्यादा बाहरी डेडज़ोन से रेंज छोटी होती है |
डेडज़ोन क्या है और डेडज़ोन टेस्ट की ज़रूरत क्यों पड़ती है
एनालॉग स्टिक कभी भी बिल्कुल 0.0000 पर आकर नहीं रुकता। स्प्रिंग, प्लास्टिक के गिम्बल और सेंसर के अपने छोटे-छोटे फ़र्क होते हैं, इसलिए छोड़ देने पर भी स्टिक केंद्र से थोड़ी दूर रहता है और संख्या हल्की सी काँपती रहती है। अगर गेम इस हर छोटी हलचल को असली इनपुट मान ले, तो कैमरा और किरदार लगातार हिलते रहेंगे। डेडज़ोन केंद्र के आसपास वह घेरा है जिसके अंदर की हर value को गेम शून्य मानता है।
समस्या यह है कि ज़्यादातर गेम एक तय डेडज़ोन लेकर आते हैं जो लाखों अलग-अलग कंट्रोलर के लिए अंदाज़े से चुनी जाती है। नए और सटीक कंट्रोलर के लिए वह ज़रूरत से बड़ी हो सकती है और पुराने पैड के लिए छोटी। डेडज़ोन टेस्ट आपके अपने कंट्रोलर की असली संख्या निकालता है, ताकि आप अंदाज़े की जगह नाप के आधार पर सेटिंग चुन सकें।
छोटी डेडज़ोन का फ़ायदा बारीक नियंत्रण है: स्नाइपर का धीमा निशाना, रेसिंग में हल्का मोड़ और प्लेटफ़ॉर्मर में धीरे चलना। बड़ी डेडज़ोन का फ़ायदा स्थिरता है। सही संतुलन वही है जिसमें डेडज़ोन आपके मापे गए विचलन से थोड़ी सी बड़ी हो।
अंदरूनी डेडज़ोन, बाहरी डेडज़ोन और एंटी डेडज़ोन का फ़र्क
अंदरूनी डेडज़ोन केंद्र वाला घेरा है, जिसके अंदर स्टिक की हलचल नज़रअंदाज़ होती है। ड्रिफ्ट रोकने के लिए यही सेटिंग सबसे अहम है। बाहरी डेडज़ोन किनारे वाली पट्टी है: स्टिक के इस हिस्से में पहुँचते ही गेम उसे पूरा 1.00 मान लेता है। यह उन कंट्रोलर के लिए उपयोगी है जिनका स्टिक किसी दिशा में असली अधिकतम तक नहीं पहुँचता।
एंटी डेडज़ोन थोड़ा अलग विचार है। कुछ गेम अपनी अंदरूनी डेडज़ोन लगाते हैं जिसे आप बंद नहीं कर सकते। ऐसे में बाहरी प्रोग्राम या कुछ गेम की सेटिंग स्टिक की छोटी value को पहले ही उस डेडज़ोन से बाहर धकेल देती है, ताकि हल्की हलचल भी तुरंत असर करे। यह तभी समझदारी है जब आपको अपने कंट्रोलर की असली हलचल पता हो, वरना ड्रिफ्ट वापस आ जाता है।
डेडज़ोन टेस्ट पहले दो की सीधी जानकारी देता है: आराम वाली रिकॉर्डिंग अंदरूनी सीमा बताती है और गोल घुमाने वाली जाँच बाहरी सीमा। एंटी डेडज़ोन के लिए भी पहला कदम यही है कि आप जानें आपका स्टिक बिना छुए कितना हिलता है।
गोल, चौकोर और अक्षीय डेडज़ोन: आकार का असर
डेडज़ोन सिर्फ़ आकार में ही नहीं, रूप में भी अलग होती है। रेडियल या गोल डेडज़ोन केंद्र से दूरी देखती है: अगर X और Y मिलाकर बिंदु घेरे के अंदर है तो इनपुट शून्य। यह ज़्यादातर आधुनिक शूटर और थर्ड पर्सन गेम के लिए सबसे स्वाभाविक लगती है, क्योंकि हर दिशा में व्यवहार एक जैसा रहता है।
अक्षीय डेडज़ोन हर axis को अलग से देखती है। अगर X की value सीमा से कम है तो सिर्फ़ X शून्य होता है, Y नहीं। इसका फ़ायदा यह है कि सीधा आगे दौड़ते समय हल्का बायाँ या दायाँ खिसकाव कट जाता है, लेकिन इसका नुकसान यह है कि तिरछी धीमी हरकत अटकी हुई लगती है, क्योंकि स्टिक पहले सिर्फ़ एक axis पर चलता दिखता है।
चौकोर डेडज़ोन इन दोनों का मिश्रण है और कई पुराने गेम में मिलती है। डेडज़ोन टेस्ट के ग्राफ़ पर आप देख सकते हैं कि आपका आराम वाला बिंदु किस तरह फैला है। अगर फैलाव एक axis पर लंबा है, तो अक्षीय डेडज़ोन अच्छी है। अगर हर तरफ़ बराबर है, तो गोल डेडज़ोन बेहतर बैठती है।
- गोल डेडज़ोन: हर दिशा में बराबर, शूटर और ओपन वर्ल्ड गेम के लिए आम पसंद
- अक्षीय डेडज़ोन: सीधी चाल स्थिर, तिरछी धीमी हरकत में अटकाव
- चौकोर डेडज़ोन: पुराने गेम में मिलती है, कोनों में असमान व्यवहार
- स्केल्ड डेडज़ोन: सीमा के बाद value को फिर से 0 से शुरू करती है, ताकि छलांग न लगे
ब्राउज़र में डेडज़ोन टेस्ट कैसे नापता है
टेस्टर W3C Gamepad API से हर फ़्रेम पर stick axes पढ़ता है। standard mapping में बायाँ स्टिक axes[0] और axes[1] पर और दायाँ स्टिक axes[2] और axes[3] पर होता है, जिनकी value -1 से +1 के बीच रहती है। इन पर हमारी तरफ़ से कोई डेडज़ोन नहीं लगाई जाती, इसलिए आप वही कच्चा सिग्नल देखते हैं जिस पर बाद में गेम अपनी डेडज़ोन लगाएगा।
आराम वाली रिकॉर्डिंग में टेस्टर हर नमूने के लिए केंद्र से दूरी निकालता है, यानी X और Y के वर्गों के जोड़ का वर्गमूल। सबसे बड़ी दूरी ही आपकी अंदरूनी डेडज़ोन की निचली सीमा है। गोल घुमाने वाली जाँच में यही दूरी हर कोण पर किनारे के लिए नापी जाती है, जिससे बाहरी डेडज़ोन की ज़रूरत पता चलती है।
ध्यान रहे कि कुछ ऑपरेटिंग सिस्टम या ड्राइवर पहले से एक छोटी डेडज़ोन लगा देते हैं। अगर धीमी हलचल वाले स्टेप में value अचानक 0 से 0.05 जैसी किसी संख्या पर उछलती है, तो इसका मतलब है कि बीच की छोटी संख्याएँ ड्राइवर में ही कट रही हैं।
डेडज़ोन टेस्ट से गेम की सेटिंग तक: व्यावहारिक तरीका
पहले आराम वाली रिकॉर्डिंग से अधिकतम विचलन लिखिए, जैसे 0.0450। फिर उसमें सुरक्षा के लिए लगभग 0.02 से 0.03 जोड़िए, क्योंकि स्टिक का व्यवहार दिन, तापमान और बैटरी के हिसाब से थोड़ा बदलता है। इस उदाहरण में 0.07 के आसपास की अंदरूनी डेडज़ोन ठीक बैठेगी। अगर गेम 0 से 100 का पैमाना दिखाता है, तो यह लगभग 7 होगा।
अब गेम में यह सेटिंग लगाकर कुछ मिनट खेलिए। अगर कैमरा या किरदार अब भी कभी-कभार हिलता है, तो एक कदम ऊपर जाइए। अगर सब स्थिर है, तो एक कदम नीचे आज़माइए। आख़िरी सेटिंग वह है जो हिलने से ठीक पहले वाली हो। दोनों स्टिक के लिए यह प्रक्रिया अलग करें, क्योंकि अक्सर दोनों का विचलन अलग होता है।
बाहरी डेडज़ोन के लिए गोल घुमाने वाली जाँच देखिए। अगर किसी दिशा में स्टिक 0.94 पर रुक जाता है, तो गेम में लगभग 0.06 की बाहरी डेडज़ोन से उस दिशा में भी पूरी value मिलेगी।
अलग-अलग गेम शैली के लिए डेडज़ोन की प्राथमिकता
हर गेम एक जैसी डेडज़ोन नहीं माँगता। प्रतिस्पर्धी शूटर में निशाने वाला दायाँ स्टिक सबसे अहम है और यहाँ खिलाड़ी आम तौर पर सबसे छोटी स्थिर सेटिंग चाहते हैं। चलने वाले बाएँ स्टिक पर थोड़ी बड़ी डेडज़ोन से कोई ख़ास नुकसान नहीं होता। रेसिंग में बायाँ स्टिक स्टीयरिंग है, इसलिए वहाँ छोटी डेडज़ोन से सड़क पर बारीक मोड़ मिलते हैं।
स्पोर्ट्स और फ़ाइटिंग गेम में अक्सर दिशा मायने रखती है, बारीक दूरी नहीं, इसलिए डेडज़ोन थोड़ी बड़ी रखने से ग़लत दिशा के इनपुट कम होते हैं। फ़्लाइट और स्पेस गेम में दोनों स्टिक पर छोटी डेडज़ोन और बाहरी डेडज़ोन का संतुलन अहम है, ताकि धीमा मोड़ और पूरी रफ़्तार दोनों मिलें।
- शूटर: दाएँ स्टिक पर सबसे छोटी स्थिर सेटिंग, बाएँ पर थोड़ी ज़्यादा
- रेसिंग: स्टीयरिंग वाले स्टिक पर छोटी अंदरूनी डेडज़ोन
- स्पोर्ट्स और फ़ाइटिंग: दिशा की सटीकता के लिए मध्यम डेडज़ोन
- फ़्लाइट और स्पेस: अंदरूनी और बाहरी दोनों का संतुलन
- प्लेटफ़ॉर्मर: धीमी चाल के लिए छोटी गोल डेडज़ोन
PS5, Xbox, Switch और PC कंट्रोलर पर डेडज़ोन का व्यवहार
Sony DualSense और DualShock 4 स्टिक की स्थिति 8 बिट में भेजते हैं, इसलिए उनकी value लगभग 0.0078 के कदमों में बदलती है। इसका मतलब है कि बहुत छोटी डेडज़ोन, जैसे 0.01, असल में सिर्फ़ एक या दो कदम के बराबर होती है। Xbox Series और Xbox One कंट्रोलर ज़्यादा बारीक रेज़ोल्यूशन देते हैं, इसलिए उनमें आराम वाली संख्या चौथे दशमलव तक हल्की-हल्की बदलती दिखती है।
Switch Pro Controller और Joy-Con के लिए Nintendo सिस्टम में स्टिक कैलिब्रेशन का विकल्प है, जो केंद्र के ऑफ़सेट को कम करके छोटी डेडज़ोन संभव बना सकता है। PC पर Steam Input जैसी सुविधाएँ कई कंट्रोलर के लिए अलग डेडज़ोन और आउटर डेडज़ोन सेट करने देती हैं, जो उन गेम में मदद करती हैं जिनमें अपनी सेटिंग नहीं होती।
किसी भी प्लेटफ़ॉर्म पर, सेटिंग बदलने से पहले और बाद में डेडज़ोन टेस्ट चलाना यह पक्का करता है कि आपने बदलाव सही दिशा में किया है।
डेडज़ोन बढ़ाना कब काफ़ी नहीं होता
डेडज़ोन ड्रिफ्ट को छिपाती है, ठीक नहीं करती। अगर आपको हर कुछ हफ़्तों में सेटिंग बढ़ानी पड़ रही है, तो स्टिक के अंदर का पोटेंशियोमीटर घिस रहा है और समस्या आगे बढ़ेगी। 0.15 से बड़ी अंदरूनी डेडज़ोन पर ज़्यादातर गेम में धीमा निशाना साफ़ तौर पर सुस्त लगने लगता है और स्टिक का पहला हिस्सा बेकार हो जाता है।
ऐसे में पहले स्टिक के आधार की सफ़ाई कीजिए, फिर दोबारा डेडज़ोन टेस्ट चलाइए। अगर विचलन कम नहीं होता, तो स्टिक मॉड्यूल बदलना या वारंटी का दावा करना बेहतर है। Hall effect या TMR जैसे बिना संपर्क वाले स्टिक वाले कंट्रोलर उन खिलाड़ियों के लिए अच्छा विकल्प हैं जो बार-बार इस समस्या से जूझते हैं।
नई डेडज़ोन सेटिंग को परखने के तीन छोटे अभ्यास
संख्या तय कर लेने के बाद उसे असली खेल में परखना ज़रूरी है, क्योंकि गेम अपनी डेडज़ोन को अलग-अलग गणित से लागू करते हैं। पहला अभ्यास स्थिरता का है: गेम में किसी खुली जगह पर खड़े होकर कंट्रोलर को मेज़ पर रख दीजिए और तीस सेकंड तक कैमरा और किरदार को देखिए। अगर कुछ भी नहीं हिलता, तो अंदरूनी डेडज़ोन काफ़ी है। अगर हल्का सा भी खिसकाव दिखे, तो सेटिंग एक कदम बढ़ाइए।
दूसरा अभ्यास धीमी हरकत का है। किसी दूर की चीज़ पर निशाना लगाइए और दाएँ स्टिक को बहुत धीरे झुकाइए। अच्छी सेटिंग में कैमरा लगभग उसी पल चलना शुरू करता है जब आप स्टिक को हिलाते हैं। अगर आपको स्टिक काफ़ी झुकाने के बाद ही हलचल महसूस होती है, तो डेडज़ोन ज़रूरत से बड़ी है और उसे एक कदम घटाकर पहला अभ्यास फिर दोहराइए।
तीसरा अभ्यास तिरछी दिशा का है। स्टिक को धीरे-धीरे ऊपर-दाएँ और नीचे-बाएँ जैसे कोणों में झुकाइए और देखिए कि हरकत सीधी तिरछी रेखा में चलती है या पहले एक दिशा में खिंचती है। अगर हरकत सीढ़ी जैसी लगे, तो गेम अक्षीय डेडज़ोन इस्तेमाल कर रहा है, और अगर सेटिंग में विकल्प हो तो गोल डेडज़ोन पर बदलना बेहतर रहेगा। तीनों अभ्यास के बाद अपनी आख़िरी संख्या लिख लीजिए, ताकि अगली जाँच में तुलना कर सकें।
डेडज़ोन टेस्ट से जुड़ी आम ग़लतफ़हमियाँ
पहली ग़लतफ़हमी यह है कि शून्य डेडज़ोन सबसे अच्छी होती है। असल में शून्य डेडज़ोन पर हर कंट्रोलर कुछ न कुछ हिलता है, इसलिए यह सिर्फ़ बहुत सटीक नए स्टिक के साथ ही काम करती है। दूसरी ग़लतफ़हमी यह है कि एक बार सही सेटिंग मिल गई तो हमेशा के लिए ठीक है। स्टिक समय के साथ बदलता है और सेटिंग भी कभी-कभी बदलनी पड़ती है।
तीसरी आम बात यह मान लेना है कि हर गेम का 10 एक जैसा होता है। अलग-अलग गेम अपने पैमाने अलग तरह से लागू करते हैं, कुछ गोल डेडज़ोन लगाते हैं, कुछ अक्षीय, और कुछ value को सीमा के बाद फिर से स्केल करते हैं। इसलिए एक गेम में मिली संख्या को दूसरे में सीधे कॉपी करने के बजाय हर गेम में छोटी जाँच करना बेहतर है।
चौथी बात यह है कि कई लोग डेडज़ोन को संवेदनशीलता से मिला देते हैं। संवेदनशीलता बताती है कि स्टिक झुकाने पर कैमरा कितनी तेज़ी से घूमे, जबकि डेडज़ोन बताती है कि हलचल कब से गिनी जाए। दोनों अलग-अलग सेट होनी चाहिए।
प्राइवेसी: डेडज़ोन टेस्ट सिर्फ़ आपके ब्राउज़र में चलता है
स्टिक की सारी रीडिंग, रिकॉर्डिंग और गोल ग्राफ़ आपके डिवाइस पर ब्राउज़र के अंदर बनते हैं। हम कोई इनपुट डेटा सर्वर पर नहीं भेजते, कोई अकाउंट नहीं माँगते और कंट्रोलर की कोई पहचान वाली जानकारी सेव नहीं करते। पेज बंद होते ही सब मिट जाता है।
Gamepad API की बनावट भी यही पक्का करती है कि कोई वेबसाइट आपकी जानकारी के बिना कंट्रोलर न देख सके। जब तक आप पेज पर कोई बटन नहीं दबाते, ब्राउज़र कंट्रोलर को छिपा कर रखता है। यही वजह है कि जाँच शुरू करने के लिए पहला बटन दबाना ज़रूरी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
डेडज़ोन टेस्ट में मेरी आदर्श डेडज़ोन कैसे निकलेगी?
आराम वाली रिकॉर्डिंग से अधिकतम विचलन लीजिए और उसमें लगभग 0.02 से 0.03 जोड़िए। जैसे 0.045 का विचलन है, तो लगभग 0.07 की अंदरूनी डेडज़ोन से शुरुआत कीजिए और गेम में थोड़ा ऊपर या नीचे करके देखिए।
गेम 0 से 100 का पैमाना दिखाता है, संख्या कैसे बदलें?
ज़्यादातर गेम में 0.07 का मतलब लगभग 7 होता है। फिर भी हर गेम अपने पैमाने को अलग तरह से लागू करता है, इसलिए सेटिंग लगाने के बाद कुछ मिनट खेलकर पक्का कीजिए कि हलचल रुक गई है।
क्या शून्य डेडज़ोन रखना ठीक है?
सिर्फ़ तब, जब आपका स्टिक बहुत सटीक हो और आराम में लगभग 0.01 से कम हिलता हो। ज़्यादातर कंट्रोलर में शून्य डेडज़ोन पर कैमरा या किरदार हल्का-हल्का हिलता रहता है।
बाहरी डेडज़ोन की ज़रूरत कब पड़ती है?
जब गोल घुमाने वाली जाँच में स्टिक किसी दिशा में 1.00 तक नहीं पहुँचता। ऐसे में उस दिशा में किरदार पूरी रफ़्तार से नहीं दौड़ता। थोड़ी बाहरी डेडज़ोन से हर दिशा में पूरी value मिलती है।
दोनों स्टिक के लिए अलग डेडज़ोन क्यों?
दोनों स्टिक अलग-अलग घिसते हैं और उनका विचलन अक्सर अलग होता है। साथ ही शूटर में दायाँ स्टिक निशाने के लिए है, जहाँ छोटी डेडज़ोन ज़्यादा मायने रखती है, जबकि चलने वाले बाएँ स्टिक पर थोड़ी बड़ी सेटिंग से फ़र्क नहीं पड़ता।
धीमी हलचल पर value अचानक उछलती क्यों है?
इसका मतलब है कि ड्राइवर या ऑपरेटिंग सिस्टम पहले से एक छोटी डेडज़ोन लगा रहा है। ऐसे में गेम में और डेडज़ोन जोड़ने से पहले इस छिपी डेडज़ोन का ध्यान रखिए, वरना कुल डेडज़ोन ज़रूरत से बड़ी हो जाएगी।
PS5 और Xbox कंट्रोलर में डेडज़ोन का फ़र्क क्यों दिखता है?
Sony कंट्रोलर स्टिक की स्थिति 8 बिट में भेजते हैं, इसलिए value लगभग 0.0078 के कदमों में बदलती है। Xbox कंट्रोलर ज़्यादा बारीक रेज़ोल्यूशन भेजते हैं। इसीलिए दोनों की आराम वाली संख्याएँ अलग तरह से दिखती हैं।
अगर हर हफ़्ते डेडज़ोन बढ़ानी पड़े तो क्या करें?
यह संकेत है कि स्टिक का पोटेंशियोमीटर घिस रहा है। स्टिक के आधार की सफ़ाई कीजिए और फिर जाँच दोहराइए। सुधार न हो तो मरम्मत, वारंटी या नया कंट्रोलर बेहतर रास्ता है।
डेडज़ोन और संवेदनशीलता में क्या फ़र्क है?
डेडज़ोन तय करती है कि स्टिक की हलचल कब से गिनी जाए, जबकि संवेदनशीलता तय करती है कि झुकाने पर कैमरा या किरदार कितनी तेज़ी से चले। दोनों अलग-अलग सेटिंग हैं और दोनों को अलग से सेट करना चाहिए।
क्या डेडज़ोन टेस्ट मेरा कोई डेटा सेव करता है?
नहीं। सारी जाँच ब्राउज़र में आपके डिवाइस पर होती है। कोई डेटा अपलोड नहीं होता, कोई लॉगिन नहीं चाहिए और पेज बंद करते ही सारी रीडिंग मिट जाती है।