input lag test: कंट्रोलर के सिग्नल की देरी मिलीसेकंड में

यह मुफ़्त input lag test बताता है कि आपका कंट्रोलर ब्राउज़र तक कितनी जल्दी और कितनी नियमितता से नया डेटा पहुँचाता है। टेस्टर लगातार आने वाले इनपुट अपडेट के बीच का समय मिलीसेकंड में नापता है, उनसे सबसे कम, औसत और सबसे ज़्यादा देरी निकालता है, और jitter यानी देरी के उतार-चढ़ाव को भी दिखाता है। शूटर, फ़ाइटिंग और रिदम गेम में जहाँ हर मिलीसेकंड मायने रखता है, वहाँ यह जानना बहुत काम का है कि USB बेहतर है या Bluetooth, कौन सा पोर्ट तेज़ है और कौन सा कंट्रोलर ज़्यादा स्थिर। कोई ऐप नहीं, कोई अकाउंट नहीं।

input lag test का डायग्राम जिसमें कंट्रोलर से USB या Bluetooth, ऑपरेटिंग सिस्टम, ब्राउज़र और स्क्रीन तक देरी की कड़ियाँ दिखाई गई हैं

अपना कंट्रोलर USB या Bluetooth से जोड़ें, फिर कोई भी बटन दबाएँ

USB Bluetooth
कंट्रोलर नहीं दिख रहा?
  • Gamepad API के सबसे अच्छे सपोर्ट के लिए Google Chrome, Microsoft Edge, Brave या Opera इस्तेमाल करें।
  • यह पेज खोलने के बाद कोई भी बटन दबाएँ या स्टिक हिलाएँ, ताकि ब्राउज़र गेमपैड को चालू कर सके।
  • Firefox में जुड़े हुए कंट्रोलर टैब को तभी दिखते हैं जब आप एक बार कोई बटन दबाते हैं।
  • macOS और iOS 16+ पर Bluetooth सेटिंग्स में देखें कि आपका कंट्रोलर पेयर हुआ है या नहीं।
स्थिर और अस्थिर अपडेट अंतराल का ग्राफ़, बराबर औसत पर अलग jitter का असर समझाते हुए

मोशन, टचपैड और बैटरी (PS4 / PS5)

WebHID मोड Sony DualShock 4, DualSense और DualSense Edge को सपोर्ट करता है।

input lag test कैसे चलाएँ: पाँच स्टेप

  1. कंट्रोलर को चुने हुए कनेक्शन से जोड़ें: जिस कनेक्शन को परखना है, उसी से कंट्रोलर जोड़ें, यानी डेटा वाली USB केबल, Bluetooth या कंट्रोलर का अपना वायरलेस एडैप्टर। तुलना करनी हो तो हर कनेक्शन के लिए जाँच अलग से दोहराएँ।
  2. एक बटन दबाकर माप शुरू करें: कोई भी बटन दबाएँ ताकि ब्राउज़र कंट्रोलर को पेज के सामने लाए। फिर दूसरे टैब और भारी प्रोग्राम बंद रखें, क्योंकि व्यस्त कंप्यूटर पर ब्राउज़र का पढ़ने का चक्र धीमा हो सकता है।
  3. स्टिक को लगातार गोल घुमाएँ: दोनों स्टिक को पाँच से दस सेकंड तक तेज़ और बराबर गति से गोल घुमाएँ। कई ब्राउज़र नया डेटा तभी देते हैं जब कुछ बदलता है, इसलिए लगातार हलचल से ही अपडेट की असली रफ़्तार नापी जा सकती है।
  4. बटन को छोटे अंतराल पर टैप करें: किसी एक्शन बटन को कई बार जल्दी-जल्दी दबाएँ। इससे टेस्टर हर दबाव और उसके ब्राउज़र तक पहुँचने के बीच के समय का अंदाज़ा लगाता है और बटन के रास्ते की देरी भी दिखती है।
  5. न्यूनतम, औसत, अधिकतम और jitter पढ़ें: आख़िर में मिलीसेकंड में सबसे कम, औसत और सबसे ज़्यादा देरी, साथ में उससे निकली अपडेट दर हर्ट्ज़ में और jitter देखें। औसत आम एहसास बताता है, जबकि अधिकतम और jitter बताते हैं कि बीच-बीच में अटकाव तो नहीं।

input lag test के नतीजे: कौन सी देरी ठीक है

अपडेट की दर और देरी आपस में जुड़े हैं: 1000 Hz का मतलब है हर 1 मिलीसेकंड पर नया डेटा, 250 Hz का मतलब 4 मिलीसेकंड और 125 Hz का मतलब 8 मिलीसेकंड। ब्राउज़र में नापी गई संख्या ब्राउज़र के अपने पढ़ने के चक्र और स्क्रीन के रिफ़्रेश रेट से भी प्रभावित होती है, इसलिए इसे पूर्ण माप की जगह तुलना का साधन मानिए। नीचे की सीमाएँ आम अनुभव पर आधारित हैं।

औसत देरीलगभग अपडेट दरगेम में एहसासक्या करें
1 से 2 ms500 से 1000 Hzबहुत तेज़, प्रतिस्पर्धी गेम के लिए उत्तमकुछ बदलने की ज़रूरत नहीं
2 से 4 ms250 से 500 Hzबहुत अच्छा, ज़्यादातर खिलाड़ियों को कोई देरी नहीं लगतीUSB पर कई Sony कंट्रोलर इसी रेंज में आते हैं
4 से 8 ms125 से 250 Hzसामान्य, आम गेमिंग के लिए पूरी तरह ठीककई Xbox कंट्रोलर के लिए यह सामान्य है
8 से 16 ms60 से 125 Hzतेज़ कैमरा मोड़ में हल्की सुस्तीBluetooth दूरी, रुकावट और USB पोर्ट जाँचें
16 ms से ज़्यादा60 Hz से कमसाफ़ महसूस होने वाली देरीकेबल से जोड़ें, हब हटाएँ, ड्राइवर अपडेट करें
jitter 5 ms से ज़्यादाबहुत अस्थिररुक-रुककर चलती हरकत, अप्रत्याशित इनपुटवायरलेस रुकावट और बैकग्राउंड लोड हटाएँ

इनपुट लैग क्या है और यह कहाँ से आता है

इनपुट लैग वह समय है जो आपके बटन दबाने और स्क्रीन पर उसका नतीजा दिखने के बीच लगता है। यह एक अकेली देरी नहीं, बल्कि कई छोटी देरियों का जोड़ है: कंट्रोलर का अपना स्कैन, USB या वायरलेस से डेटा भेजना, ऑपरेटिंग सिस्टम और ड्राइवर, गेम इंजन का फ़्रेम बनाना, और आख़िर में मॉनिटर या टीवी का तस्वीर दिखाना। इनमें से हर कड़ी कुछ मिलीसेकंड जोड़ती है।

ब्राउज़र वाला input lag test इस श्रृंखला के पहले हिस्से पर ध्यान देता है, यानी कंट्रोलर से कंप्यूटर तक का रास्ता। यही वह हिस्सा है जिसे आप सबसे आसानी से बदल सकते हैं: केबल बदलकर, Bluetooth से USB पर जाकर, पोर्ट बदलकर या वायरलेस रुकावट हटाकर। मॉनिटर और गेम इंजन की देरी इस माप में शामिल नहीं होती।

इसलिए नतीजे को किसी गेम के कुल लैग की तरह मत पढ़िए। इसका असली फ़ायदा तुलना में है: एक ही कंट्रोलर को दो कनेक्शन पर, या दो कंट्रोलर को एक ही कंप्यूटर पर परखकर आप साफ़ देख सकते हैं कि कौन सा विकल्प तेज़ और ज़्यादा स्थिर है।

ब्राउज़र में input lag test तकनीकी रूप से कैसे नापता है

W3C Gamepad API हर कंट्रोलर के साथ एक timestamp देता है, जो बताता है कि उस कंट्रोलर का डेटा आख़िरी बार कब बदला। टेस्टर बहुत तेज़ चक्र में कंट्रोलर की स्थिति पढ़ता है और देखता है कि यह timestamp या बटन और axis की value कब बदली। दो लगातार बदलावों के बीच का समय ही अपडेट अंतराल है, और हज़ारों ऐसे अंतराल से औसत, न्यूनतम, अधिकतम और jitter निकाला जाता है।

यहाँ दो सीमाएँ समझना ज़रूरी है। पहली, ब्राउज़र ख़ुद एक तय रफ़्तार से कंट्रोलर को पढ़ता है, और अगर कंट्रोलर उससे तेज़ डेटा भेजता है तो बीच के कुछ अपडेट दिखाई नहीं देते। दूसरी, पेज का अपना चक्र अक्सर स्क्रीन के रिफ़्रेश रेट से जुड़ा होता है। 60 Hz स्क्रीन पर एक फ़्रेम लगभग 16.7 मिलीसेकंड का और 144 Hz पर लगभग 6.9 मिलीसेकंड का होता है।

इन सीमाओं के बावजूद एक ही कंप्यूटर, ब्राउज़र और स्क्रीन पर की गई तुलना भरोसेमंद रहती है, क्योंकि सीमाएँ हर माप पर बराबर लागू होती हैं। इसलिए हर जाँच एक जैसी स्थिति में दोहराइए।

USB, Bluetooth और वायरलेस एडैप्टर: किसमें कितनी देरी

USB केबल आम तौर पर सबसे कम और सबसे स्थिर देरी देती है, क्योंकि डेटा एक तय अंतराल पर सीधे तार से आता है और वायरलेस रुकावट का कोई सवाल नहीं होता। इसी वजह से प्रतिस्पर्धी गेमिंग में बहुत से खिलाड़ी केबल से खेलना पसंद करते हैं, भले ही वायरलेस कंट्रोलर उनके पास हो।

Bluetooth पर अपडेट दर कंट्रोलर और कंप्यूटर के Bluetooth चिप दोनों पर निर्भर करती है। कई कंट्रोलर Bluetooth पर भी अच्छी रफ़्तार देते हैं, लेकिन यहाँ jitter अक्सर ज़्यादा होता है, क्योंकि Bluetooth एक ही रेडियो पर हेडफ़ोन, माउस और Wi-Fi के साथ जगह बाँटता है। Xbox कंट्रोलर के लिए Microsoft का अपना वायरलेस एडैप्टर और कई थर्ड पार्टी पैड के 2.4 GHz डोंगल अलग रेडियो प्रोटोकॉल इस्तेमाल करते हैं और कई बार Bluetooth से ज़्यादा स्थिर रहते हैं।

सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप अपने ही सेटअप पर तीनों विकल्प परखें। हर कनेक्शन पर जाँच चलाइए, औसत और jitter लिखिए और फिर तय कीजिए।

  • USB केबल: आम तौर पर सबसे कम और सबसे स्थिर देरी
  • Bluetooth: सुविधाजनक, पर दूरी और रुकावट से jitter बढ़ता है
  • 2.4 GHz डोंगल या Xbox वायरलेस एडैप्टर: अक्सर Bluetooth से ज़्यादा स्थिर
  • USB हब: कभी-कभी अतिरिक्त अस्थिरता जोड़ता है
  • कमज़ोर बैटरी: कुछ कंट्रोलर में वायरलेस सिग्नल कमज़ोर कर सकती है

औसत देरी से ज़्यादा अहम है jitter

मान लीजिए दो कंट्रोलर की औसत देरी 4 मिलीसेकंड है। पहले में हर अपडेट लगभग ठीक 4 मिलीसेकंड पर आता है, जबकि दूसरे में कभी 1 मिलीसेकंड पर, कभी 15 मिलीसेकंड पर। दोनों का औसत एक जैसा है, लेकिन दूसरा कंट्रोलर गेम में कहीं ज़्यादा बेचैन लगेगा, क्योंकि आपका दिमाग़ एक स्थिर लय की उम्मीद करता है और अचानक की देरी निशाने को बिगाड़ देती है।

jitter यही उतार-चढ़ाव है। नतीजों में अधिकतम देरी और jitter को औसत के साथ हमेशा देखिए। कम jitter वाला थोड़ा धीमा कनेक्शन अक्सर ज़्यादा jitter वाले तेज़ कनेक्शन से बेहतर महसूस होता है। अगर jitter 5 मिलीसेकंड से ऊपर जाता है, तो वायरलेस रुकावट, USB हब या बैकग्राउंड में चल रहे भारी प्रोग्राम पहले संदिग्ध हैं।

PS5, PS4, Xbox और Switch कंट्रोलर पर input lag test

Sony DualShock 4 और DualSense USB पर PC से जुड़ने पर आम तौर पर तेज़ अपडेट भेजते हैं, और बहुत से माप में ये 250 Hz के आसपास दिखते हैं, यानी लगभग 4 मिलीसेकंड। Bluetooth पर इनका व्यवहार कंप्यूटर के Bluetooth चिप और ड्राइवर के हिसाब से बदलता है। ब्राउज़र की अपनी पढ़ने की सीमा भी असली दर को छिपा सकती है।

Xbox One और Xbox Series कंट्रोलर Windows पर आम तौर पर लगभग 125 Hz दिखाते हैं, यानी हर 8 मिलीसेकंड पर नया डेटा। यह संख्या सुनने में कम लगती है, लेकिन ये कंट्रोलर बहुत स्थिर लय रखते हैं और ज़्यादातर गेम के लिए पूरी तरह काफ़ी हैं। Nintendo Switch Pro Controller PC पर Bluetooth से अक्सर इनसे धीमा दिखता है।

ये संख्याएँ आम अनुभव हैं, गारंटी नहीं। फ़र्मवेयर, ऑपरेटिंग सिस्टम, ब्राउज़र और कनेक्शन बदलते ही नतीजे बदल सकते हैं, इसलिए अपने सेटअप पर खुद जाँचना सबसे भरोसेमंद है।

input lag test में देरी ज़्यादा आए तो क्या करें

पहला कदम कनेक्शन को सरल बनाना है। कंट्रोलर को USB हब या मॉनिटर के USB पोर्ट की जगह सीधे कंप्यूटर के पिछले पोर्ट में लगाइए। लैपटॉप पर अलग-अलग पोर्ट आज़माइए, क्योंकि कुछ पोर्ट अंदर एक ही कंट्रोलर चिप पर कई डिवाइस के साथ जुड़े होते हैं। डेटा वाली अच्छी केबल इस्तेमाल कीजिए।

Bluetooth पर हैं तो कंट्रोलर और कंप्यूटर के बीच की दूरी कम कीजिए और बीच में धातु की चीज़ें या दीवार हटाइए। Wi-Fi राउटर, वायरलेस हेडसेट और दूसरे Bluetooth डिवाइस भी रुकावट डाल सकते हैं। अगर कंप्यूटर का अंदरूनी Bluetooth कमज़ोर है, तो अच्छा USB Bluetooth एडैप्टर कई बार बड़ा फ़र्क लाता है।

आख़िर में सॉफ़्टवेयर देखिए: ब्राउज़र को अपडेट कीजिए, भारी बैकग्राउंड प्रोग्राम बंद कीजिए और लैपटॉप को बिजली बचाने वाले मोड से हटाकर बेहतर प्रदर्शन वाले मोड पर रखिए। फिर माप दोबारा चलाकर तुलना कीजिए।

  • सीधे कंप्यूटर के पोर्ट में लगाएँ, हब से बचें
  • डेटा वाली अच्छी केबल इस्तेमाल करें
  • Bluetooth पर दूरी और रुकावट कम करें
  • ज़रूरत हो तो बेहतर USB Bluetooth एडैप्टर आज़माएँ
  • बिजली बचाने वाला मोड बंद करें
  • ब्राउज़र और कंट्रोलर फ़र्मवेयर अपडेट करें

मॉनिटर, टीवी और गेम की देरी का हिसाब

कंट्रोलर की देरी अक्सर पूरी श्रृंखला का छोटा हिस्सा होती है। कई टीवी तस्वीर को सुधारने के लिए प्रोसेसिंग करते हैं, जिससे दसियों मिलीसेकंड जुड़ सकते हैं। ज़्यादातर टीवी में गेम मोड होता है जो यह प्रोसेसिंग कम करके देरी घटाता है। गेमिंग मॉनिटर आम तौर पर टीवी से कम देरी देते हैं।

गेम का फ़्रेम रेट भी अहम है। 30 फ़्रेम प्रति सेकंड पर हर फ़्रेम लगभग 33 मिलीसेकंड का होता है, जबकि 120 फ़्रेम पर लगभग 8.3 मिलीसेकंड का। इसलिए कई बार कंट्रोलर बदलने से ज़्यादा फ़र्क गेम में फ़्रेम रेट बढ़ाने या टीवी पर गेम मोड चालू करने से पड़ता है। input lag test आपको बताता है कि कंट्रोलर वाला हिस्सा ठीक है, ताकि आप बाक़ी कड़ियों पर ध्यान दे सकें।

बटन की देरी और स्टिक की देरी अलग क्यों दिख सकती है

कंट्रोलर हर अपडेट में बटन और स्टिक दोनों की स्थिति एक साथ भेजता है, इसलिए सिद्धांत में दोनों की देरी बराबर होनी चाहिए। फिर भी व्यवहार में बटन टैप वाली जाँच कभी-कभी अलग संख्या दिखाती है। वजह यह है कि बटन का बदलाव एक पल की घटना है और वह दो अपडेट के बीच कहीं भी पड़ सकता है, जबकि स्टिक लगातार बदलता रहता है और हर अपडेट में नया डेटा देता है।

कुछ कंट्रोलर बटन के संपर्क के उछाल को छाँटने के लिए अंदर थोड़ा इंतज़ार भी करते हैं, जिसे debounce कहा जाता है। यह कुछ मिलीसेकंड जोड़ सकता है। इसलिए बटन वाली देरी को स्टिक वाली अपडेट दर से थोड़ा ज़्यादा देखना असामान्य नहीं।

इसका एक व्यावहारिक नतीजा भी है। फ़ाइटिंग और रिदम गेम में, जहाँ बटन का सही पल सबसे अहम है, बटन टैप वाली संख्या पर ज़्यादा ध्यान दीजिए। शूटर और रेसिंग में, जहाँ स्टिक की लगातार हरकत निशाना और दिशा तय करती है, स्टिक घुमाने वाली अपडेट दर और उसका jitter ज़्यादा मायने रखते हैं। अगर किसी कंट्रोलर में स्टिक की दर अच्छी है लेकिन बटन वाली देरी बार-बार ऊँची आती है, तो दूसरे बटन पर भी यही जाँच कीजिए। एक ही बटन पर ज़्यादा देरी अक्सर उस बटन के घिसे संपर्क की ओर इशारा करती है, कनेक्शन की ओर नहीं।

दो कंट्रोलर की निष्पक्ष तुलना कैसे करें

तुलना तभी सही है जब बाक़ी सब बराबर हो। दोनों कंट्रोलर को एक ही कंप्यूटर, एक ही ब्राउज़र, एक ही पोर्ट और एक ही स्क्रीन पर परखिए। हर कंट्रोलर के लिए माप कम से कम तीन बार चलाइए और औसत लीजिए, क्योंकि एक अकेला माप बैकग्राउंड की किसी हलचल से बिगड़ सकता है।

नतीजे लिखते समय सिर्फ़ औसत नहीं, बल्कि अधिकतम देरी और jitter भी लिखिए। अगर दोनों कंट्रोलर का औसत लगभग बराबर है, तो कम jitter वाला कंट्रोलर तेज़ गेम में बेहतर रहेगा। अगर फ़र्क एक मिलीसेकंड से कम है, तो ज़्यादातर खिलाड़ी उसे महसूस नहीं कर पाएँगे, और तब आराम, बटन की बनावट और बैटरी जैसी चीज़ें ज़्यादा मायने रखती हैं।

क्या ज़्यादा polling rate हमेशा बेहतर है

ज़्यादा अपडेट दर का मतलब है हर अपडेट के बीच कम इंतज़ार, इसलिए सिद्धांत में यह बेहतर है। लेकिन फ़ायदा घटता जाता है: 125 Hz से 250 Hz पर जाने से औसत इंतज़ार लगभग 2 मिलीसेकंड कम होता है, जबकि 500 Hz से 1000 Hz पर सिर्फ़ लगभग 0.5 मिलीसेकंड। साथ ही ज़्यादा दर वायरलेस कंट्रोलर की बैटरी तेज़ी से खाती है।

कई खिलाड़ी तीसरे पक्ष के टूल से कंट्रोलर की अपडेट दर बढ़ाते हैं। यह कुछ कंट्रोलर पर काम करता है, लेकिन इससे अस्थिरता, ज़्यादा CPU उपयोग या वायरलेस पर ड्रॉप भी आ सकते हैं। ऐसे किसी बदलाव से पहले और बाद में input lag test चलाकर देखिए कि असल में सुधार हुआ या सिर्फ़ संख्या बदली।

मोबाइल और लैपटॉप पर लैग जाँचने की सलाह

Android फ़ोन पर Chrome में कंट्रोलर जोड़कर भी यही जाँच चलाई जा सकती है। फ़ोन में Bluetooth और Wi-Fi अक्सर एक ही चिप साझा करते हैं, इसलिए Wi-Fi पर भारी डाउनलोड चलते समय कंट्रोलर का jitter बढ़ सकता है। क्लाउड गेमिंग या रिमोट प्ले से पहले यह जाँच ख़ास तौर पर काम की है।

लैपटॉप पर बैटरी मोड का बड़ा असर पड़ता है। बिजली बचाने वाले मोड में प्रोसेसर और USB पोर्ट धीमे हो सकते हैं। चार्जर लगाकर और बेहतर प्रदर्शन वाले मोड में एक बार जाँच कीजिए, फिर बैटरी मोड में, और फ़र्क देखिए।

प्राइवेसी: input lag test आपके डिवाइस पर ही चलता है

सारे माप आपके ब्राउज़र के अंदर बनते हैं। अपडेट के समय, देरी की संख्या और jitter कुछ भी हमारे सर्वर पर नहीं भेजा जाता। कोई अकाउंट नहीं, कोई ट्रैकिंग नहीं, और पेज बंद होते ही सारा डेटा मिट जाता है।

Gamepad API भी कंट्रोलर को तब तक छिपाकर रखता है जब तक आप पेज पर कोई बटन नहीं दबाते। इसलिए कोई वेबसाइट आपकी जानकारी के बिना यह नहीं जान सकती कि आपके पास कौन सा कंट्रोलर है।

आधिकारिक हार्डवेयर स्पेसिफ़िकेशन: MDN High-Resolution Gamepad.timestamp Spec

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

input lag test क्या नापता है?

यह कंट्रोलर से ब्राउज़र तक आने वाले लगातार अपडेट के बीच का समय मिलीसेकंड में नापता है और उससे न्यूनतम, औसत, अधिकतम देरी, अपडेट दर और jitter निकालता है। मॉनिटर और गेम इंजन की देरी इसमें शामिल नहीं होती।

क्या यह गेम का कुल इनपुट लैग बताता है?

नहीं। कुल लैग में कंट्रोलर, कनेक्शन, ऑपरेटिंग सिस्टम, गेम इंजन और स्क्रीन सब शामिल हैं। यह जाँच सिर्फ़ कंट्रोलर से कंप्यूटर तक का हिस्सा परखती है, जो तुलना के लिए सबसे उपयोगी है।

USB और Bluetooth में से कौन तेज़ है?

आम तौर पर USB कम और ज़्यादा स्थिर देरी देता है। Bluetooth भी अच्छा हो सकता है, लेकिन दूरी और रुकावट से jitter बढ़ता है। अपने सेटअप पर दोनों पर जाँच करके तय कीजिए।

Xbox कंट्रोलर सिर्फ़ 125 Hz क्यों दिखाता है?

कई Xbox कंट्रोलर Windows पर लगभग 125 Hz की दर से डेटा भेजते हैं, यानी हर 8 मिलीसेकंड पर। यह सामान्य है और इनकी लय बहुत स्थिर रहती है, जो ज़्यादातर गेम के लिए काफ़ी है।

jitter क्या है और कितना ठीक है?

jitter अपडेट के बीच के समय का उतार-चढ़ाव है। कम jitter का मतलब है स्थिर लय। कुछ मिलीसेकंड तक सामान्य है, लेकिन 5 मिलीसेकंड से ज़्यादा होने पर हरकत रुक-रुककर महसूस हो सकती है।

स्क्रीन का रिफ़्रेश रेट नतीजे पर असर डालता है?

हाँ, पेज का पढ़ने का चक्र अक्सर स्क्रीन के रिफ़्रेश से जुड़ा होता है। 60 Hz स्क्रीन पर एक फ़्रेम लगभग 16.7 मिलीसेकंड का होता है। तुलना हमेशा एक ही स्क्रीन पर कीजिए।

स्टिक घुमाना क्यों ज़रूरी है?

कई ब्राउज़र नया डेटा तभी देते हैं जब कंट्रोलर की कोई value बदलती है। लगातार गोल घुमाने से हर अपडेट में नया डेटा आता है और असली अपडेट दर नापी जा सकती है।

USB हब से देरी बढ़ती है?

कुछ हब, ख़ासकर बिना बिजली वाले या कई डिवाइस से भरे हब, अस्थिरता जोड़ सकते हैं। सबसे साफ़ नतीजे के लिए कंट्रोलर को सीधे कंप्यूटर के पोर्ट में लगाइए।

क्या मोबाइल पर भी input lag test चलता है?

हाँ, Android पर Chrome में कंट्रोलर जोड़कर जाँच की जा सकती है। फ़ोन पर Wi-Fi और Bluetooth एक ही चिप साझा कर सकते हैं, इसलिए भारी डाउनलोड के दौरान jitter बढ़ सकता है।

क्या यह टेस्ट मेरा डेटा सेव करता है?

नहीं। सारे माप आपके ब्राउज़र में बनते और वहीं रहते हैं। कुछ भी अपलोड नहीं होता, कोई लॉगिन नहीं चाहिए और पेज बंद करते ही सब मिट जाता है।

Sources

  1. W3C Gamepad Specification
  2. MDN Web Docs: Gamepad API
  3. MDN Web Docs: WebHID API
  4. PlayStation Support: DualSense controller on PC
  5. Xbox Support: Connect controller to PC
  6. Nintendo Support: Joy-Con troubleshooting